सूचना | मध्य प्रदेश दृष्टि पत्र - 2018 ( 100 दिवसीय कार्य योजना ) | Adoption दिशा निर्देश | बाल गृह में निवासरत बच्चों का दत्तक ग्रहण | सारा की वेब पर ओन लाइन रजिस्ट्रेशन के संबंध में | सड़क पर रहने वाले बच्चों के कल्याण हेतु योजना

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दत्तक

दत्तक ग्रहण से अभिप्राय ऐसी प्रक्रिया से है, जिसके माध्यम से वास्तविक माता-पिता से स्थायी रूप से अलग हो चुका बच्चा, क्योंकि उनकी मृत्यु हो चुकी है या जो उसे बेसहारा बना कर छोड़ चुके हैं, सभी अधिकारों, विशेष लाभों और दायित्वों के साथ, जो इस संबंध के साथ जुड़े है, दत्तक ग्रहण करने वाले माता-पिता के रूप में संदर्भित नए माता-पिता के पास जाकर वैधानिक प्रक्रिया के उपरांत वैध संतान बन जाता है।

मातापिता/पालक

कोई भी व्यक्ति बच्चें को दत्तक पर ले सकता है चाहे वह:-

 एक व्यक्ति को चाहे उसकी वैवाहिक स्थिाति कुछ भी हो।

 माता पिता को उसी लिंग का बच्चा चाहे उसके कितने ही जीवित जैविक पुत्र या पुत्रियां हो।

 एक निःसंतान दंपत्ति को।

एजेंसी

अनाथ, बेसहारा और निराश्रित बच्चों को दत्तक ग्रहण कराने के लिए किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण ) अधिनियम, 2000 ( संशोधन, 2006) में राज्य सरकारों को एसएए के रूप में अपने प्रत्येक जिले में किसी संस्था या स्वयंसेवी संगठनों में से एक या अधिक को चुनना है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार विषेषज्ञ दत्तक ग्रहण एजेंसी की मान्यता देगी। यह एजेंसी निराश्रित, बेसाहारा, अनाथ, छोड़े हुए बच्चों को संस्था में संरक्षण-भरण पोषण प्रदान कर उन्हे परिवार में पुर्नस्थापित करवाने के उद्देश्य के तहत् नियमानुसार दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया अपनाकर बच्चों को उन्के संभावित माता-पिता को सौपेगी।

सारा

राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन अभिकरण:-राज्य स्तर पर दत्तक ग्रहण योजना का क्रियान्वयन करना एवं प्रवर्तकता, पालन पोषण देखरेख, स्वदेशी और अंतरदेशीय दत्तक ग्रहण के माध्यम से बच्चों को परिवार में पुर्नस्थापित करवाने का कार्य करती है

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